Tuesday, January 26, 2016

मेरा बचपन बहुत मजेदार था। मैं हर रोज खेलती थी दोस्तों के साथ।  मैं और मेरी माँ रोज पार्क जाते थे और बतख को खाना खिलते थे।  में अपने भाई के साथ बहुत मस्ती करती थी और कभी -कभी हम एक दुसरे के साथ खेलते भी थे।  बचपन में मैं थोड़ी शरारती भी थी।  कभी -कभी मैं अपने पिता की चीजे छिपती थी और आपके बताती नहीं थी। लेकिन मैं बहुत मदद भी करती थी। कभी -कभी मैं अपनी माँ को रसोई में मदद करती थी।  मैं थोड़ी खाना भी पकाती थी।  बचपन में मैं और मेरी सहेलियाँ हर रोज लूका छिपी खेलती थी। मुझे मेरा बचपन बहुत ही पसंद थी।  मैं बहुत मज़ा करती थी मेरे परिवार और दोस्तों के साथ हर गर्मी में मैं भारत जाती थी मेरे परिवार से मिलने के लिये। वहा मैं बहुत खाती थी और खेलती भी थी।  मुझे भारत बहुत पसंद थी।  मेरा बचपन बहुत ही सूख और मजे से भरा थी।  मुझे मेरी बचपन की कभी -कभी याद आती है। 

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